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जानिए कश्मीर का इतिहास और 370 क्यों और किसने बनाई थी?

🚩जानिए कश्मीर का इतिहास और 370 क्यों और किसने बनाई थी?
05 अगस्त 2019
http://azaadbharat.org
🚩प्राचीनकाल में कश्मीर हिन्दू संस्कृति का गढ़ रहा है। यहाँ पर भगवान शिव और माता पार्वती रहते थे । यहाँ झील में देवताओं का वास था, वहाँ एक राक्षस भी रहने लगा, जो देवताओं को सताने लगा, जिसका वैदिक ऋषि कश्यप और देवी सती ने मिलकर अंत कर दिया, ऋषि कश्यप द्वारा उस असुर को मारने से उस जगह का नाम कश्यपमर पड़ा, जो आगे चलकर कश्मीर नाम से जाना जाने लगा ।

🚩कश्मीर संस्कृत विद्या का विख्यात केन्द्र रहा। कश्मीर शैवदर्शन भी यहीं पैदा हुआ और पनपा। यहां के महान मनीषियों में पतञ्जलि, दृढ़बल, वसुगुप्त, आनन्दवर्धन, अभिनवगुप्त, कल्हण, क्षेमराज आदि हैं। यह धारणा है कि विष्णुधर्मोत्तर पुराण एवं योगवशिष्ठ यहीं लिखे गये।
🚩कश्मीर सदियों तक एशिया में #संस्कृति एवं दर्शन शास्त्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा और संतों का दर्शन यहां की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
🚩प्राचीन काल में यहाँ हिन्दू आर्य राजाओं का राज था। मौर्य सम्राट अशोक और कुषाण सम्राट कनिष्क के समय कश्मीर बौद्ध धर्म और संस्कृति का मुख्य केन्द्र बन गया। पूर्व-मध्ययुग में यहाँ के चक्रवर्ती सम्राट ललितादित्य ने एक विशाल साम्राज्य कायम कर लिया था।
🚩मध्ययुग में मुस्लिम आक्रान्ता कश्मीर पर काबिज हो गये। कुछ मुसलमान शाह और राज्यपाल (जैसे शाह ज़ैन-उल-अबिदीन) हिन्दुओं से अच्छा व्यवहार करते थे पर कई (जैसे सुल्तान सिकन्दर बुतशिकन) ने यहाँ के मूल कश्मीरी हिन्दुओं को मुसलमान बनने पर, या राज्य छोड़ने पर या मरने पर मजबूर कर दिया। कुछ ही सदियों में कश्मीर घाटी में मुस्लिम बहुमत हो गया। मुसलमान शाहों में ये बारी बारी से अफगान, कश्मीरी मुसलमान, मुगल आदि वंशों के पास गया।
🚩मुगल सल्तनत गिरने के बाद ये सिख महाराजा रणजीत सिंह के राज्य में शामिल हो गया। कुछ समय बाद जम्मू के हिन्दू डोगरा राजा गुलाब सिंह डोगरा ने ब्रिटिश लोगों के साथ सन्धि करके जम्मू के साथ साथ कश्मीर पर भी अधिकार कर लिया (जिसे कुछ लोग कहते हैं कि कश्मीर को खरीद लिया)। डोगरा वंश भारत की आजादी तक कायम रहा।
🚩भारत की स्वतन्त्रता के समय हिन्दू राजा हरि सिंह यहाँ के शासक थे।  कश्मीर को लेने के लिए पाकिस्तानी फौज द्वारा आक्रमण हुआ उस समय जवाहरलाल नेहरु प्रधानमंत्री थे उन्होंने भारतीय सेना भेजने से इन्कार कर दिया, लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल ने हवाई जहाज से कश्मीर में सैन्य भेजा तब तक कश्मीर का दो तिहाई हिस्सा पाकिस्तान कब्जाने में सफल रहा।
🚩कश्मीर का बाकी का हिस्सा गुरुजी (माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर) के समझाने पर महाराजा ने भारत में विलय कर दिया। भारतीय सेना ने कश्मीर राज्य का काफी हिस्सा बचा लिया । भारतीय सेना दो हिस्से लेने की तैयारी में थी तबतक नेहरू ने सैन्य को युद्ध विराम दे दिया । जो आजतक पोक आदि हिस्से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हैं । नेहरू की वजह से आज तक अलगावादी नेता वहाँ राज कर रहे हैं ।
🚩370 और 35a किसने बनवाई:
देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने मित्र शेख अब्दुल्ला के आग्रह पर आर्टिकल 370 का और 35 ए को लागू करने का निर्णय किया था, किंतु नेहरू जब इस आर्टिकल 370 को संविधान सभा में लेकर गए और सबके सामने रखा तो एक भी व्यक्ति इसका समर्थन करने को तैयार नहीं था और वहां यह पास ना हो सका, सरदार पटेल गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री थे और नेहरू ने सरदार पटेल से आग्रह किया कि आर्टिकल 370 को संविधान सभा से पास करा दीजिए, सरदार पटेल नहीं माने नेहरू ने सोचा कि कांग्रेस कार्यसमिति के अधिकांश लोग तो संविधान सभा के भी सदस्य हैं, यदि यह कांग्रेस की कार्यसमिति से पास हो गया तो फिर हम संविधान सभा से भी इसे पास करा सकते हैं, किंतु जब प्रस्ताव कांग्रेस कार्यसमिति के सामने रखा गया तो कांग्रेस की कार्यसमिति ने भी एक स्वर से इसका विरोध किया कि ऐसा संभव नहीं है ।
🚩अब नेहरू के मित्र शेख अब्दुल्ला पुनः विलाप करते हुए नेहरू के पास गये और नेहरू ने इस बार गोपाल स्वामी आयंगर को निर्देश दिया कि आप यह आर्टिकल 370 संविधान सभा में पास करवाएंगे और पटेल से कहा कि इसके लिए जो भी करना पड़े वह कीजिए ।
🚩गोपाल स्वामी आयंगर ने स्पष्ट कहा कि “ ठीक है मैं यह कर देता हूं, किंतु यह गलत है और भविष्य में आपको पछताना पड़ेगा”,
वी पी मेनन ने भी यह अपनी बायोग्राफी में लिखा है कि “मैं मना करता रहा, लेकिन क्योंकि प्रधानमंत्री नेहरू के आदेश का पालन करना था इसलिए मैंने यह किया”
लेकिन इस कानून की गंभीरता और दुष्परिणाम को समझते हुए उन्होंने उस आर्टिकल 370 में क्लॉज़ डाल दिया कि यह एक अस्थाई यानी टेंपरेरी धारा थी और आज मोदी सरकार ने आर्टिकल 370 को हटा दिया ।
🚩कश्मीर से धारा 370 एवं 35A हटाने की सभी राष्ट्रनिष्ठ एवं हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों की मांग पूर्ण करने के लिए प्रधानमंत्री श्री. नरेंद्र मोदी जी और गृहमंत्री श्री अमित शाह जी का धन्यवाद !
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