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इतिहास उठाकर देखें संतों की जय-जयकार होती रही है और निंदकों की दुर्गति

🚩जिन भी #संतों-महापुरुषों ने #संस्कृति #रक्षा व #जन-जागृति का कार्य किया है, उनके #खिलाफ #षड्यंत्र रचे गये हैं । जगद्गुरु आद्य #शंकराचार्यजी का इतना #कुप्रचार किया गया कि उनकी माँ के अंतिम संस्कार के लिए उन्हें लकड़ियाँ तक नहीं मिल रही थीं । #महात्मा बुद्ध पर बौद्ध भिक्षुणी के साथ अवैध संबंध एवं उसकी हत्या का #आरोप लगाया गया ।
🚩#स्वामी विवेकानंदजी पर #चारित्रिक #आरोप लगाकर उन्हें खूब बदनाम किया गया । #संत नरसिंह मेहताजी को बदनाम करने व फँसाने के लिए वेश्या को भेजा गया । #संत कबीरजी पर शराबी, कबाबी, वेश्यागामी होने के #घृणित #आरोप लगाये गये । भक्तिमती #मीराबाई पर चारित्रिक #लांछन लगाये गये एवं जान से मारने के कई दुष्प्रयास हुए ।
Seeing the history, the saints have been
cheering and the evil of the slanderers
🚩#संत ज्ञानेश्वरजी और उनके भाइयों व बहन को निंदकों द्वारा #समाज-बहिष्कृत किया गया था । संत #तुकारामजी को #बदनाम करने हेतु उन पर जादू-टोना और पाखंड करने के #झूठे आरोप लगाये गये व वेश्या भेजी गयी । इतना परेशान किया कि उन्हें अपने अभंगों की बही नदी में डालनी पड़ी और उपराम हो के 13 दिनों तक उपवास करना पड़ा ।
🚩वर्तमान में भी #शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वतीजी, #स्वामी नित्यानंदजी, #स्वामी केशवानंदजी, श्री #कृपालुजी महाराज, #संत आशारामजी बापू, #साध्वी प्रज्ञा सिंह आदि हमारे #संतों को #षड्यंत्र में फँसाकर #झूठे आरोप लगा के #गिरफ्तार किया गया, प्रताड़ित किया गया, अधिकांश #मीडिया द्वारा #झूठे आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया परंतु जीत हमेशा सत्य की ही होती रही है और होगी ।
🚩सत्यमेव जयते । ‘सत्य की ही विजय होती है ।’
🚩इतिहास उठाकर देखें तो पता चलेगा कि #सच्चे संतों व महापुरुषों की #जय-जयकार होती रही है और आगे भी होती रहेगी । दूसरी ओर #निंदकों की #दुर्गति होती है और समाज उन्हें घृणा की दृष्टि से ही देखता है । अतएव समझदारी इसीमें है कि हम संतों का आदर करके या उनके आदर्शों को अपनाकर लाभ न ले सकें तो कम-से-कम उनकी निंदा करके या सुनके अपने पुण्य व शांति को तो नष्ट न करें ।
🚩इतिहास देखें तो पता चलेगा कि सच्चे संतों व महापुरुषों के #निन्दकों को कैसे-कैसे #भीषण कष्टों को सहते हुए #बेमौत मरना पड़ा है और पता नहीं किन-किन नरकों में सड़ना पड़ा है। अतैव समझदारी इसी में है कि हम संतों की प्रशंसा करके या उनके आदर्शों को अपना कर लाभ न ले सकें तो उनकी निन्दा करके अपने पुण्य व शांति भी नष्ट नहीं करनी चाहिए।
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2 Comments

  1. Charu joshi Charu joshi April 25, 2018

    सत्य कहा है।

  2. Ketan Ketan April 25, 2018

    Ham high court me appeal karenge Pujya gurudev nishkalank Bahar aayenge

Comments are closed.

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