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समलैंगिक संबंध अपराध नहीं ? जानिए इससे कितना भयंकर होता है नुकसान.

06 September 2018
🚩 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध माना गया था । आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक, जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता है तो इस अपराध के लिए उसे 10 वर्ष की सज़ा या आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया था । इसमें जुर्माने का भी प्रावधान था और इसे ग़ैर ज़मानती अपराध की श्रेणी में रखा गया था ।
🚩देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया है । इसके अनुसार आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अब अपराध नहीं माना जाएगा ।
🚩वर्तमान कानून से अब कोई भी महिला, महिला के साथ और कोई भी पुरूष, पुरुष के साथ अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बना सकता है, इसे कोई अपराध नहीं माना जाएगा ।
Gay sex is not crime? Know how terrible it is to harm.
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🚩यह प्रथा विदेशो में चलती है भारत एक आध्यत्मिक देश है यहाँ अप्राकृतिक संबध बनाना पाप माना जाता है, ये भगवान, शास्त्र विरुद्ध कार्य है जो मनुष्य को भयंकर नुकसान पहुँचाता है ।
🚩‘द चिल्ड्रंस सोसायटी’ ने साल 2015 में 14 साल के करीब 19 हजार किशोरों से मिली जानकारी का विश्लेषण किया । संस्था की रिपोर्ट बताती है कि समान लिंग के प्रति आकर्षण रखने वाले किशोरों और बाकी किशोरों के बीच खुशी के मामले में काफी अंतर था । एक चौथाई से ज्यादा समलैंगिक किशोर अपने जीवन से कम संतुष्ट थे । वहीं सर्वे में शामिल सभी लोगों के बीच यह आंकड़ा महज 10 फीसदी तक था ।
🚩करीब 40 फीसदी किशोरों में अत्यधिक डिप्रेशन के लक्षण पाए गए. रिपोर्ट कहती है कि कि सभी किशोरों में से करीब 15 फीसदी ने पिछले साल खुद को नुकसान पहुंचाया. वहीं समलैंगिक किशोरों में ऐसे लोगों की संख्या लगभग 50 फीसदी के बराबर थी ।
🚩हिन्दू धर्म में समलैंगिक संबंधों पर प्रतिबंध है इसे नैतिक पतन का लक्षण माना जाता है । इसलिए यहाँ पकड़े जाने पर समलैंगिकों को हमेशा कठोर सजा दी जाती थी ।
🚩आज धीरे-धीरे कर देश इस तरह के एक ही शारीरिक सम्बन्ध की शादियों को स्वीकार करने लगा है । समलैंगिकता को अब कानूनी दर्जा मिल रहा है । एक ही सेक्स के दो लोग अब शादी रचाकर एक साथ रहने के लिए आजाद है, लेकिन ये शादी ना केवल समाज के नियमों को तोड़ती है बल्कि प्रकृति के नियमों का भी उल्लघंन करती है ।
🚩यह प्राकृतिक कानून का उल्लंघन है :- 
शादी दो इंसानों के बीच का संबंध है, जिसे समाज द्वारा जोड़ा जाता है और उसे प्रकृति के नियमों के साथ आगे चलाया जाता है । समाज में शादी का उद्देश्य शारीरिक संबंध बनाकर मानव श्रृखंला को चलाना है । यहीं नेचर का नियम है । जो सदियों से चलता आ रहा है, लेकिन समलैंगिक शादियां मानव श्रृंखला के इस नियम को बाधित करती है ।
🚩अधर में बच्चे का भविष्य:- 
सामान्यतः बच्चों का भविष्य मां-बाप के संरक्षण में पलता है । समलैगिंक विवाह की स्थिति में बच्चों का विकास प्रभावित होता है । वो या तो मां का प्यार पाते हैं या पिता का सहारा । मां-बाप का प्यार उन्हें एक -साथ नहीं मिल पाता जो उनके विकास को प्रभावित करता है । संडे टेलिग्राफ’ अखबार के मुताबिक समलैंगिक शादी उस मूलभूत विचार को बिल्कुल खत्म कर देगा कि हर बच्चे को मां और बाप दोनों चाहिए ।
🚩समलैंगिक जीवन शैली को बढ़ावा देता है:-
एक ही सेक्स में विवाह की कानूनी मान्यता जरूरी है । ये शादियां समाज के नियम के साथ-साथ पारंपरिक शादियों को नुकसान पहुंचाती है । लोगों के सोचने के नजरिए को प्रभावित करती है । बुनियादी नैतिक मूल्यों , पारंपरिक शादी के अवमूल्यन, और सार्वजनिक नैतिकता को कमजोर करता है ।
🚩नागरिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल:-
समलैंगिक कार्यकर्ताओं को एक ही सेक्स में शादी करने का मुद्दा 1960 के दशक में नस्लीय समानता के लिए संघर्ष का मुद्दा बन गया था । एक औरत और एक मर्द के बीच उनके रुप-रंग, लंबाई-चौड़ाई को बिना ध्यान में रखे संबंध बनाया जा सकता है, लेकिन एक ही सेक्स में शादी प्रकृति का विरोध करता है । एक ही लिंग के दो व्यक्तियों, चाहे उनकी जाति का, धन, कद अलग हो संभव नहीं होता ।
🚩बांझपन को बढ़ावा देता है:- 
प्रकृतिक शादियों में महिलाएं बच्चे को जन्म देती हैं, लेकिन समलैंगिक शादियों में दंपत्ति प्रकृतिक तौर पर बांझपन का शिकार होता है ।
🚩सेरोगेसी के बाजार को मिलता है बढ़ावा:-
एक ही लिंग की शादियों में दंपत्ति बच्चा पैदा करने में प्रकृतिक तौर पर असमर्थ होता है । ऐसे में वो सेरोगेसी या किराए की कोख का इस्तेमाल कर अपनी मुराद को पूरा करना का प्रयास करता है । समलैंगिक विवाह के कारण सेरोगेसी के बाजार को बढ़ावा मिलता है ।
🚩भगवान भी होते हैं नाराज
यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है । यह शादी भगवान द्वारा स्थापित प्राकृतिक नैतिक आदेश का उल्लंघन करती है और भगवान नाराज होते हैं ।
🚩समाज पर दबाव:-
समलैंगिक शादियां समाज पर अपनी स्वीकृति के लिए दबाव डालती है । कानूनी मान्यता के कारण समाज को जबरन इन शादियों को मंजूर करना ही होता है । जिन देशों में समलैंगिक शादियों को कानूनी मान्यता मिल चुकी है, उन देशों में समलैंगिक शादियों से पैदा हुए बच्चों को शिक्षा देनी ही होती है । अगर कोई व्यक्ति या अधिकारी इसका विरोध करता है तो उसे विरोध का सामना करना पड़ता है ।
🚩मनुष्य को इतने भयंकर नुकसान के कारण ही समलैंगिक संबध बनाना गैरकानूनी था, पर अभी पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के कारण आज देशवासी भी पशुता की ओर जाने लगे है इससे सावधान रहना जरूरी है ।
🚩न्यायालय के पास आम जनता, श्री राम मंदिर, धारा 370, कश्मीर पंडितों के लिए समय नहीं है, पर अप्राकृतिक संबध बनाने वाले फैसला सुनाने के लिए समय मिल जाता है ।
🚩भारत मे गौमाता की रक्षा के लिए कानून नहीं बना पा रहे हैं और समलैंगिक संबध के लिए कानून बना रहे हैं, कितने दुर्भाग्य की बात है ।
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One Comment

  1. Surender kumar Surender kumar September 6, 2018

    Reality is that this is against law of nature.

    Why no order to abolish Article 370? Why no justice to Kashmiri Pandits?

    Why delay there? Is judicial system has any solid excuse?

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