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धर्मशिक्षा के अभाव के कारण बलात्कार के 1.10 लाख मामले दर्ज किए गए

🚩भारत मे अन्य देशों की बलात्कार मामले की बहुत कम संख्या है लेकिन महान भारत देश के लिए एक भी बलात्कार की घटना शर्म की बात है । भारत मे पहले एक भी बलात्कार नही होते थे जबसे मुगल और अंग्रेज आये तब से लेकर आज भी वही सिलसिला है जिसको रोकना जरूरी है ।
🚩जब भी किसी महिला के साथ बलात्कार होता है तो सारे बुद्धिजीवी केंडल मार्च निकालना शुरू कर देते है और मीडिया 24 घण्टो खबरे दिखाने लगती है कि इतने बलात्कार क्यो हो रहे है उसपर कोई ध्यान नही देता, आगे किसी महिला के साथ दुष्कर्म न हो इसपर कोई चर्चा नही करता, कानून के बल पर कुछ अंश में रोक लग सकती है लेकिन पूर्णता रोक लगने के लिए बचपन से ही धर्म की शिक्षा देना जरूरी है । अगर व्यक्ति के अंदर अच्छे संस्कार नही होंगे तो वे अपराध करेगा ही ।
1.10 lakh cases of rape were registered due to lack of education
🚩आज जितने बलात्कार होते है उसके मूल में जाओगे तो आपको मिलेगा की उसके जीवन मे धर्म की शिक्षा ही नही है ऊपर से टीवी में जो चलचित्र चलते है बॉलीवुड में जो अश्लीलता परोसी जा रही है मीडिया में जो नंगापन दिखाया जा रहा है, इंटरनेट पर पोर्न फिल्म आदि जो दिखाई जाती है उससे प्रेरित होकर ही अधिकतर बलात्कार होते है। अगर टीवी, मीडिया, इंटरनेट और सिनेमाघरों में धर्मिक सिरियल, फिल्मे चलने लग जाये नॉवेल, अख़बारो में धार्मिक लेख और चित्र छपने लगे और बचपन से ही धर्म की शिक्षा दी जाये तो बिना कानून के ही बलात्कार रुक जाएगा ।
🚩अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने बताया है कि, 2014 से 2016 के दौरान देशभर में बलात्कार के 1,10,333 मामले दर्ज किए गए । केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी । उन्होंने बताया कि 2016 में बलात्कार के 38,947 मामले दर्ज किए गए जबकि 2015 में 34,651 और 2014 में 36,735 मामले दर्ज किए गए थे
🚩उन्होंने बताया कि, 2014 में महिलाओं
के खिलाफ अपराध के 3,39,457 मामले दर्ज किए गए जबकि 2015 में 3,29,243 मामले और 2016 में 3,38,954 मामले दर्ज किए गए ।
स्त्रोत : नवभारत टाइम्स
🚩बलात्कार के मामले जितने दर्ज किये गए है उसमें कुछ तो झूठे मामले होते है जो मनचली लड़कियां पैसे या बदला लेने की भावना से केस दर्ज कराती है और कुछ सज्जन महिलाओं के साथ दुष्कर्म हो भी जाता है फिर भी किसी को बताते नही है ऐसे भी कई केस होंगे जो मामले दर्ज नही करवाये होंगे ।
🚩यदि सख्त कानून से बलात्कार की घटनाओं पर अंकुश सम्भव होता तो नये बलात्कार निरोधक कानून बनने के बाद बलात्कार की शिकायतों (कम्प्लेंट्स) में 35% की वृद्धि नहीं होती । इसके लिए संयम-शिक्षा तथा सच्चे सात्त्विक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना होगा । यह कार्य निस्वार्थ रूप से समाज की भलाई में लगे हुए संत-महापुरुष ही कर सकते हैं । भारतीय संस्कृति के आधारभूत सिद्धांत को अपने जीवन में उतारनेवाले स्वामी रामतीर्थ, श्री रमण महर्षि, समर्थ रामदासजी, स्वामी विवेकानंद, साँईं लीलाशाहजी महाराज आदि महापुरुषों ने पूरी दुनियां में भारतीय अध्यात्म-ज्ञान का डंका बजाया । वर्तमान में संत आसारामजी बापू से मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से देश-विदेश में करोड़ों साधक ब्रह्मचर्य का पालन करके जीवन धन्य बना रहे हैं । हजारों बाल-संस्कार केन्द्रों द्वारा देश-विदेश के बालक-बालिकाओं को सुसंस्कारित किया जा रहा है । करोड़ों युवाओं को संयमी और व्यशन मुक्त बनाया । महिलाओं के उत्थान के लिये अनेक कार्य किये और भी अनेक समाजसेवा के कार्य बापू आसारामजी की प्रेरणा से चल रहे हैं ।
🚩केवल कानून और डंडे के जोर से सच्चा सुधार नहीं हो सकता । सच्चे और स्थायी सुधार के लिए बलात्कार जैसे नृशंस अपराधो को रोकने के लिए संयम-शिक्षा पर बल देने की आवश्यकता है । संत आसारामजी बापू द्वारा प्रेरित ‘युवाधन सुरक्षा अभियान’, ‘दिव्य प्रेरणा-प्रकाश ज्ञान प्रतियोगिता’, ‘योग व उच्च संस्कार शिक्षा’, ‘महिला जागृति’, ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’, ‘नशामुक्ति’ जैसे अभियानों को और अधिक व्यापक बनाने की आवश्यकता है । इनके माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी को ब्रह्मचर्य, संयम-सदाचार की शिक्षा देकर उन्हें ईमानदार व सच्चा नागरिक बनाया जा रहा है । किंतु हमारे प्रेरणास्रोत, राष्ट— एवं संस्कृति के रक्षक संतों-महापुरुषों पर झूठे आरोप लगवाकर षड्यंत्रपूर्वक उन्हें जेल में बंद करवाना यह दर्शाता है कि कुछ स्वार्थी राष्ट्र विरोधी ताकतें कानून की आड़ लेकर भारतीय संस्कृति को नष्ट करने की बुरी मंशा रखती हैं । संत-महापुरुष ही समाज के प्रहरी हैं  हमें उन पर हो रहे इस आघात को रोकना होगा ।
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