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संस्कृत में पढ़ाई करके छात्र बन सकेंगे इंजीनियर और डॉक्टर, पाठ्यक्रम तैयार

3 दिसंबर 2018
🚩देववाणी संस्कृत में 1700 धातुएं, 70 प्रत्यय और 80 उपसर्ग हैं, इनके योग से जो शब्द बनते हैं, उनकी संख्या 27 लाख 20 हजार होती है । यदि दो शब्दों से बने सामासिक शब्दों को जोड़ते हैं तो उनकी संख्या लगभग 769 करोड़ हो जाती है । संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा और वैज्ञानिक भाषा भी है । इसके सकारात्मक तरंगों के कारण ही ज्यादातर श्लोक संस्कृत में हैं । आज दुनिया मे जितनी भाषाएँ है संस्कृत से ही उनका उद्गम हुआ है ।
🚩संस्कृत की सर्वोत्तम शब्द-विन्यास युक्ति के, गणित के, कंप्यूटर आदि के स्तर पर नासा व अन्य वैज्ञानिक व भाषाविद संस्थाओं ने भी इस भाषा को एकमात्र वैज्ञानिक भाषा मानते हुए इसका अध्ययन आरंभ कराया है और भविष्य में भाषा-क्रांति के माध्यम से आने वाला समय संस्कृत का बताया है । अतः अंग्रेजी बोलने में बड़ा गौरव अनुभव करने वाले, अंग्रेजी में गिटपिट करके गुब्बारे की तरह फूल जाने वाले कुछ महाशय जो संस्कृत में दोष गिनाते हैं उन्हें कुँए से निकलकर संस्कृत की वैज्ञानिकता का एवं संस्कृत के विषय में विश्व के सभी विद्वानों का मत जानना चाहिए ।
Engineer and doctor will be able to become a student by studying in Sanskrit
🚩आपको बता दें कि संस्कृत के छात्र अब दुनिया से कदमताल करेंगे । उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में पढ़ाई का ढर्रा बदलेगा । पुरोहित-शिक्षक ही नहीं यहां के विद्यार्थी इंजीनियर व डॉक्टर भी बन सकेंगे । माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने नया पाठ्यक्रम तैयार कर लिया है ।
🚩जनवरी में गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने संस्कृत बोर्ड के छात्रों का नया पाठ्यक्रम तैयार कर लिया है । इसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा । इंटर की पढ़ाई तीन वर्गो में विभाजित कर दी गई है। उत्तर मध्यमा प्रथम (कक्षा 11) व उत्तर मध्यमा द्वितीय (कक्षा 12) में कला, विज्ञान व वाणिज्य वर्ग का गठन होगा । वर्तमान पाठ्यक्रम में संस्कृत के साथ गणित, विज्ञान वैकल्पिक विषय के तौर पर शामिल हैं । ऐसे में संस्कृत बोर्ड के छात्र भी विज्ञान वर्ग से पढ़ाई कर इंजीनियरिंग व मेडिकल के क्षेत्र में जा सकेंगे ।
🚩उप निरीक्षक लखनऊ मंडल की पाठ्यक्रम समिति व अतिरिक्त सदस्य रेनू वर्मा का कहना है कि नया पाठ्यक्रम बन गया है । अब शासन से अनुमोदन शेष है । नए सत्र से नए पैटर्न पर पढ़ाई होगी । संस्कृत बोर्ड के छात्रों को भी अब इंजीनियर-डॉक्टर बनने का मौका मिलेगा ।
🚩वर्तमान पाठ्यक्रम में कक्षा 11 में तीन अनिवार्य विषय, 51 वैकल्पिक विषय हैं । ऐसे ही कक्षा 12 में भी तीन अनिवार्य व 51 वैकल्पिक विषय हैं । कक्षा छह से आठ तक तीन अनिवार्य विषय व 20 वैकल्पिक विषय हैं । वहीं कक्षा नौ में तीन अनिवार्य व 37 वैकल्पिक विषय हैं । कक्षा 10 में भी तीन अनिवार्य व 37 वैकल्पिक विषय हैं । ऐसे में कुल 15 अनिवार्य व 196 के करीब वैकल्पिक विषय हैं । वहीं नए पाठ्यक्रम में विषयों की सूची सौ के अंदर होगी । कारण, इसमें कई विषयों को हटा दिया गया, वहीं कई को एक कर दिया गया । मसलन, संस्कृत गद्य व और संस्कृत पद्य काव्य को एक विषय कर दिया गया ।
🚩बता दें कि देववाणी संस्कृत मनुष्य की आत्मचेतना को जागृत करने वाली, सात्विकता में वृद्धि , बुद्धि व आत्मबलप्रदान करने वाली सम्पूर्ण विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा है । अन्य सभी भाषाओ में त्रुटि होती है पर इस भाषा में कोई त्रुटि नहीं है । इसके उच्चारण की शुद्धता को इतना सुरक्षित रखा गया कि सहस्त्र वर्षों से लेकर आज तक वैदिक मन्त्रों की ध्वनियों व मात्राओं में कोई पाठभेद नहीं हुआ और ऐसा सिर्फ हम ही नहीं कह रहे बल्कि विश्व के आधुनिक विद्वानों और भाषाविदों ने भी एक स्वर में संस्कृत को पूर्णवैज्ञानिक एवं सर्वश्रेष्ठ माना है । 
🚩संस्कृत भाषा ही एक मात्र साधन हैं, जो क्रमशः अंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं ।  इसका अध्ययन करने वाले छात्रों को गणित, विज्ञान एवं अन्य भाषाएं ग्रहण करने में सहायता मिलती है । वैदिक ग्रंथों की बात छोड़ भी दी जाए तो भी संस्कृत भाषा में साहित्य की रचना कम से कम छह हजार वर्षों से निरंतर होती आ रही है । संस्कृत केवल एक भाषा मात्र नहीं है, अपितु एक विचार भी है । संस्कृत एक भाषा मात्र नहीं, बल्कि एक संस्कृति है और संस्कार भी है। संस्कृत में विश्व का कल्याण है, शांति है, सहयोग है और वसुधैव कुटुंबकम की भावना भी है ।
🚩केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों को सभी स्कूलों, कॉलेजों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य करना चाहिए जिससे बच्चों की बुद्धिशक्ति का विकास के साथ साथ बच्चे सुसंस्कारी बने ।
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One Comment

  1. Ghanshyam das godwani Ghanshyam das godwani December 3, 2018

    संस्कृत भाषा ही एक मात्र साधन हैं, जो क्रमशः अंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं । इसका अध्ययन करने वाले छात्रों को गणित, विज्ञान एवं अन्य भाषाएं ग्रहण करने में सहायता मिलती है । वैदिक ग्रंथों की बात छोड़ भी दी जाए तो भी संस्कृत भाषा में साहित्य की रचना कम से कम छह हजार वर्षों से निरंतर होती आ रही है । संस्कृत केवल एक भाषा मात्र नहीं है, अपितु एक विचार भी है । संस्कृत एक भाषा मात्र नहीं, बल्कि एक संस्कृति है और संस्कार भी है। संस्कृत में विश्व का कल्याण है, शांति है, सहयोग है और वसुधैव कुटुंबकम की भावना भी है ।

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