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मीडिया की तरह न्यायालय भी हिंदू विरोधी बन रही है?

14 जुलाई 2019
🚩जिस प्रकार से मीडिया का हिंदुओं के विरुद्ध एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा है ठीक उसी प्रकार अब ऐसा लगता है कि न्यायालय भी हिन्दू विरोधी फैसले देने लगा है और कानून का भी इस्तेमाल हिंदुओं के खिलाफ हथियार की तरह किया जा रहा है और इस हथियार की  चोट ऐसी है जिससे न्यायालयों की अस्मिता खतरे में है ।

🚩हमारा भारत देश एक धर्म प्रधान देश रहा है एक ऐसा देश जो सभी धर्म को धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है, एक ऐसा देश जहाँ अलग-अलग धर्मों के लोग भाईचारे के साथ रहते हैं । क्या ये आज के परिवेश में सही है ? नहीं, हिंदुओं ने सदैव भाईचारे का कार्य किया लेकिन बदले में उसे क्या मिला ? उसकी मान्यताओं का गला घोंटा गया, उसकी आस्था पर प्रहार किया गया यहां तक कि अनेक प्रकार की धार्मिक स्वतंत्रता छीन ली गयी । मुस्लिम धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर कितने ही जीवों की हत्या करें, गौ माता को सरेआम काटें कोई कुछ नहीं बोलता, लेकिन जल्लीकट्टू को पशुओं के अधिकारों का हनन कह उसे बैन करते हैं । ईसाई, धर्म प्रचार के नाम पर कुछ भी करें तो कोई बुराई नहीं है, लेकिन हिंदुओं की मान्यताएं अन्धविश्वास कहलाई जाती है ।
🚩हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन किया जा रहा है और न्यायालय की भी इसमें भूमिका है। अब इस देश का न्यायालय ये तय करेगा कि दही हांडी की ऊँचाई कितनी हो, शिवरात्रि के दिनों में कितना जल चढ़ाया जाए, दीवाली में कब तक आतिशबाजी की जाए, ऐसे फैसले देने के लिए तो न्यायालय तत्पर है लेकिन तकरीबन 150 सालों से अटके हुए राम मंदिर के मुकदमें में कोई कार्यवाही नहीं हो रही ।

🚩अब तो इस देश का बच्चा-बच्चा भी जान गया होगा कि देश में हिन्दू और मुस्लिमों के बीच अयोध्या के जमीन को लेकर विवाद चल रहा है । पूर्व काल से ही उस जमीन पर श्री राम मंदिर था जिसे बाबर ने तोड़ मस्जिद बना दिया, विवाद गहराया कि उस स्थान पर मंदिर बनें या मस्जिद तो इस मामले को कोर्ट में डाला गया, लेकिन हमारी महान सुप्रीम कोर्ट का इस अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में ढीलापन देखिए कि 10 साल तक उसे इस मामले में बेंच बनाने का समय भी नहीं मिला । जलीकट्टू के लिए समय है, दही हांडी की ऊंचाई पर फैसले देने का समय है, सबरीमाला पर फैसले देती है, याकूब मेमन जैसे आतंकी के लिए रात को 2 बजे कोर्ट खुलती है, रातों-रात फैसला आ जाता है, लेकिन अयोध्या विवाद के लिए ?
🚩पहली तारीख आयी 29 जनवरी, जिसमें एक जज को ही संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया गया, फिर कहा गया कि अब से दो महीने बाद हम तारीख देंगे कि अगली बेंच कब बनाई जाएगी और एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा बीच में ही लटक गया । हद तो तब हो जाती है जब सुप्रीम कोर्ट के तथाकथित बुद्धिमान श्री राम के होने का प्रमाण मांगते हैं । श्रीराम नवमी की छुट्टी मनाने वाले जज ही श्री राम के होने का प्रमाण मांगते हैं ।
🚩दूसरा एक अहम मुद्दा कि जब सबरीमाला पर एक मुस्लिम महिला ने दावा किया कि वहाँ महिलाओं को प्रवेश की अनुमति हो तब आव देखा न ताव सीधा फैसला लिख दिया, लेकिन वहीं दूसरी ओर जब एक हिन्दू ने अर्जी डाली कि मस्जिद में मुस्लिम महिलाओं को प्रवेश मिले तो न्यायालय कहता है कि जो पीड़ित है उसे सामने लाओ, यही बात क्यों सबरीमाला के समय याद नहीं आयी ?
🚩कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की सुनवाई के लिए याचिका दायर की तो 27 साल पुराना मामला बताकर खारिज कर दिया, लेकिन जो देश के लिए खतरा बने हुए है ऐसे रोहिंग्याओं के लिए याचिका पर सुनवाई करने के लिए कोर्ट स्वीकार कर लेता है ।
🚩न्यायालय की मनमानियों का यहीं अंत नहीं होता है, आगे गौर फरमाइयेगा कि हिन्दू संत जो समाज को जागरूक करते हैं, लोगों के जीवन में नई चेतना लाते हैं,  हिंदुत्ववादी लोग जो धर्म के लिए जीते और मरते हैं उनपर झूठे आरोप लगते हैं, उनके खिलाफ़ कोई सबूत नहीं, ऐसे सबूत जो चीख-चीख कर उन निर्दोषों की निर्दोषता को प्रमाणित करते हैं उन सबका गला घोंट कर नजरअंदाज कर दिया गया और समाज सेवा के बदले, धर्म की सेवा के इनाम में उन निर्दोषों को मिलती है जेल की सलाखें, लेकिन वहीं दूसरी ओर हमारी माननीय न्यायालय उदार हो जाती है उन पादरियों और मौलवियों के लिए जो बलात्कार जैसे घिनौने कार्य को अंजाम देते हैं, समाज में गंदगी फैलाते हैं और उन्हें छूट दे दी जाती है, शायद उनसे माननीय न्यायधीश का कोई पुराना रिश्ता निकल आता होगा ।
🚩हमारे देश में करोड़ों लोगों का विश्वास अब न्यायालय के फैसलों से उठता रहा है । आश्चर्य तो तब होता है जब सच को झूठ और झूठ को सच करार देते हुए, माननीय न्यायधीश के हाथ नहीं काँपते ? क्या इसलिए ही आपने न्याय का चोला पहना है ? अरे जिन न्यायलयों में आज तक अंग्रेजों की पोशाकें पहनी जाती है, उस अंग्रेज की पोशाक पहनने वालों से न्याय की गुंजाइश हो भी कैसे सकती है ।
🚩अब हम सबको एकत्र हो अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी ही होगी वरना वो दिन दूर नहीं जब न्यायालय हिन्दू धर्म को मानने पर ही रोक लगा दे और हिंदुओं का जीना दूभर हो जाए ।
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