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न्यायालय ने 35 साल बाद दिया न्याय, लाखों खर्चे, तब मिला 7500 का हर्जाना

23 मई 2019

🚩कहावत है कि देरी से न्याय मिलना भी अन्याय के बराबर ही है । न्याय पाने के लिए इंसान अपना समय, शक्ति, पैसे, इज्जत सब बर्बाद कर देता है उसके बाद भी अगर न्याय न मिले या देरी से मिले तो अन्याय ही हुआ । जैसे कि भूख अभी है और 5 दिन बाद खाना मिले तो इंसान बीमार हो जाएगा, फिर खाना भी नहीं पचेगा, यही हाल न्याय प्रणाली में है न्याय आज चाहिए और मिलता है सालों के बाद ।

🚩न्याय दोनों को चाहिए जिनके ऊपर झूठे मुकदमे दर्ज हुए है उन्हें और जो स्वयं पीड़ित है उन्हें, पर हमारी कछुआछाप न्यायप्रणाली के कारण उनको न्याय नहीं मिल रहा है ।

🚩ऐसा एक मामला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से सामने आया है । यहां 1372 रुपये गबन के मामले में एक व्यक्ति को 35 साल न्याय पाने में लग गए । राम प्रताप यादव के साथ जब ये धोखाधड़ी हुई तब उनकी उम्र 35 वर्ष थी, अब जब कोर्ट का फैसला आया तो वे 70 वर्ष के हो गए ।

🚩सुल्तानपुर के बल्दीराय तहसील के पड़रे डाकघर की शाखा में 35 साल पहले राम प्रताप यादव ने अपना पैसा जमा किया था । उनका आरोप था कि डाकिया जगदीश प्रसाद ने उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उनके खाते से 1372 रुपये निकाल लिए । यादव ने मामले की शिकायत डाक विभाग के आला अधिकारियों से की । अधिकारियों ने जांच में मामले को सहीं पाया । प्रकरण का विचारण 1984 से अदालत में चल रहा था । जिसका निवारण बुधवार को अदालत ने किया।

🚩35 साल बाद मिले 7500 रुयये-

कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि 35 साल पहले आरोपित एक लोक सेवक होते हुए नवयुवक था । उसकी लगातार कोर्ट में उपस्थिति, 70 साल की आयु और गबन की कम धनराशि को देखते हुए 3 साल के कारावास की सजा तथा 10 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया जाता है । साथ ही कोर्ट ने जुर्माने की रकम में से 7500 रुपये पीड़ित राम प्रताप यादव को दिए जाने का आदेश सुनाया ।

🚩राम प्रसाद यादव ने बताया कि मुकदमा लड़ते-लड़ते मेरी जमीन बिक गई और लाखों रुपये खर्च हुए । मेरी यही अपील है कि न्याय में इतनी देरी नहीं होनी चाहिए ।

🚩तो आपने देखा न्याय पाते-पाते जमीन बिक गई, लाखों रुपये खर्च हुए, समय बर्बाद हुआ और न्याय मिला बुढ़ापे में । ये तो एक मामला आपको बताया है पर ऐसे लाखों मामले होंगे जो हमारे समक्ष नहीं हैं, आज हर व्यक्ति न्याय पाने के लिए कोर्ट के चक्कर लगाते रहते हैं, पर उनको मिलती है तो सिर्फ तारीख ही ।

🚩न्यायालय में आप जाएंगे तो देखेंगे कि अधिकतर गरीब तबके के लोग ही चक्कर लगाते हैं, बाकी अमीर और प्रतिष्ठित व्यक्ति का केस केवल वकील ही लड़ते हैं, गरीब व्यक्ति न्याय पाने के लिए अपने घर, जमीन, गहने बेच देता है, न्यायालय के कितने चक्कर लगाता है तब कहीं सालों बाद न्याय मिलता है ।

🚩आजकल झूठे केस करने का ट्रेंड चल पड़ा है वो भी खतरनाक रूप ले रहा है क्योंकि सच में जो पीड़ित हैं, उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और जिन निर्दोष लोगों पर झूठे मुकदमे किये जा रहे हैं उनको भी न्याय नहीं मिल रहा है, निर्दोष सालों तक जेल में बंद रहते हैं और दोषी आराम से बहार घूमते हैं । जो झूठे केस दायर कर रहे हैं, उनको भी कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए, जिससे निर्दोष पर कोई झूठे आरोप न लगाए ।

🚩सरकार और न्यायायल को इसपर ध्यान देना चाहिए । जो पीड़ित हैं उन्हें और जिन निर्दोषों पर झूठ केस लगाया गया हो, उन दोनों को न्याय मिले । जिनको झूठे मामलों में सेशन कोर्ट ने सजा भी सुना दी है, ऐसा जिस केस में लगता है उनको भी तुंरत रिहा करना चाहिए ।

🚩सरकार का एक ऐसा भी कर्तव्य बनता है कि समाज को भारतीय संस्कृति एवं श्रीमद्भागवतगीता अनुसार शिक्षा दी जाए, ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए । जिससे देश में कम अपराध हों जिससे न्यायालय, सरकार और जेल प्रशासन को ज्यादा परेशानी न हो सब अपने दिव्य कर्म करके मनुष्य जीवन को सफल बनाए ।

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