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दीपक चौरसिया पर लगा POCSO Act गिरफ्तार करने की उठी तीव्र मांग

18 नवम्बर 2019
www.azaadbharat.org
सोशल मीडिया पर 15 नवंबर 2019 को #ArrestDeepakChaurasia हैशटैग द्वारा पत्रकार दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी की मांग ने जोर पकड़ा और यह मांग इतनी तीव्र हुई कि पूरा दिन राष्ट्रीय टॉप ट्रेंड्स में यह हैशटैग अपना स्थान बनाये रहा । आखिर क्यों लोगों द्वारा दीपक चौरसिया को गिरफ्तार करने की मांग की जा रही है ??
आइये जाने क्या है मामला ??

दीपक चौरसिया जो INDIA News चैनल में पत्रकार था । उसने इसी चैनल द्वारा 12 दिसम्बर 2013 को पैसों की एवं टीआरपी की लालच में एक मासूम बच्ची के वीडियो को तोड़-मरोड़कर अश्लील तरीके से पेश किया, जिससे एक नाबालिग बच्ची के मान-सम्मान को ठेस पहुँची और इस परिवार की भावनायें आहत हुई। वास्तव में यह वीडियो 02 जुलाई 2013 का था। उस समय हिंदू संत आसाराम बापू गुरुग्राम में थे और संजय पटेल जी के यहाँ पगफेरे के लिए आए थे । वहां बापू आसारामजी ने सब परिवारजनों के बीच उनकी भतीजी के कंधे पर हाथ रखकर उसे आशीर्वाद दिया था और इसका विडियो परिजनों ने मोबाइल फोन से लिया था । इस विडियो में हेरफेर कर दीपक चौरसिया ने उसे अश्लील ढंग से अपने चैनल पर कई बार प्रसारित किया ।
इस परिवार ने इस अपराध के लिए चौरसिया के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने की ठानी लेकिन प्रशासन ने उनकी कोई सहायता नहीं की । पहले उस नाबालिग लड़की के फूफा संजय पटेल पालम विहार थाने में Zero FIR दर्ज कराने गए तो वहां की पुलिस ने ये कहते हुए मना कर दिया कि ये केस तो नोयडा पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है ।
यहाँ हम अपने पाठकों को बताना चाहेंगे कि बापू आसारामजी पर केस करने वाली लड़की शाहजहांपुर (उ.प्र.) की रहने वाली है, पढ़ती थी छिंदवाड़ा (म.प्र.) में, घटना बताती है जोधपुर (राज.) की और उसके द्वारा की गई ZERO FIR दर्ज हो जाती है दिल्ली के कमला मार्किट थाने में ।
लेकिन वहीं दूसरी ओर संजय पटेल की भतीजी जो पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र की ही रहने वाली है उसकी प्राथिमिकी (FIR) दर्ज करने को पुलिस तैयार नहीं थी ।
दीपक चौरसिया ने पैसे और टीआरपी के लिए मासूम बच्ची का झूठा MSS दिखाकर बच्ची की इज्जत को तार-तार किया।
POCSO Act होने के बाद भी पुलिस गिरफ्तार नही करने पर जनता का गुस्सा फूटा #ArrestDeepakChaurasia हैशटैग लेकर ट्रेंड चलाया। 80 हजार से ऊपर ट्वीट हुई।
आम आदमी और हिंदुनिष्ठ पर तुरंत कार्यवाही करने वाली पुलिस बिकाऊ पत्रकारों डरती है या उनके लिए अलग कानून है?

जब पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं हुई तो इस आहत परिवार ने हिन्दू संगठनों और महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया और वहां से इनके साथ हो रहे अन्याय पर कई हिन्दू संगठन व महिला आयोग इनके समर्थन में आये और दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी की मांग ने तेजी पकड़ी ।
तथाकथित पत्रकार दीपक चौरसिया ने ZERO FIR रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की । हाईकोर्ट ने दीपक चौरसिया को गिरफ्तारी से तो राहत दी पर अपराध को संगीन मानते हुए उसको सेशन कोर्ट में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया से गुजरने का आदेश दिया ।
इसके बावजूद भी पुलिस द्वारा कार्यवाही ना होने के पर आहत संजय पटेल ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की । जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने सबूतों को देखते हुए  17 नवम्बर 2014 को प्रशासन को कार्यवाही का आदेश दिया और नोयडा पुलिस को सारी फ़ाइल गुरुग्राम पुलिस को सौंपने को कहा और फिर 19 मार्च 2015 को गुरुग्राम में IPC की धारा 469, 471, 120B, POCSO Act की धारा 13C और IT Act की धारा 67B के तहत FIR संख्या 147/15 दर्ज हुई ।
देखिए कैसे एक परिवार को केवल FIR दर्ज करवाने के लिए ही गुरुग्राम, नोयडा, इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चक्कर काटने पड़े पर अफसोस न्याय के लिए इस परिवार को और भी बहुत दर्द अभी झेलना बाकि था ।
चौरसिया के खिलाफ POCSO Act में मामला दर्ज हुआ । इसलिए जांच के लिए SIT का गठन तो हुआ लेकिन अफसोस SIT द्वारा जो Criminal Procedure Code की धारा 164 के तहत नाबालिग लड़की के बयान, Criminal Procedure Code की धारा 161 के तहत परिवार और साक्षियों के बयान, आरोप सिद्ध करने वाली CD की FSL जांच, आरोपियों से पूछताछ आदि कानूनन कार्यवाही नहीं की गयी ।
इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर केस से पल्ला झाड़ता रहा, वारंट जारी होने के बाद भी चौरसिया कभी न्यायालय में मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं हुआ और संजय पटेल को बताए बिना केस बंद कर दिया गया ।
फिर से पुलिस अधिकारियों के सामने गुहार लगाई गई, लोगों ने धरना प्रदर्शन किया, महिला संगठनों ने आवाज उठाई, तब फिर मुश्किल से CrPC की धारा 161 में बयान दर्ज किए और CD को FSL जांच के लिए भेजा गया ।
संजय पटेल ने फिर आहत होकर चंडीगढ़ हाईकोर्ट में गुहार लगाई । हाईकोर्ट ने 22 दिसम्बर 2017 को गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर को 4 सप्ताह में जांच पूरी करके रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए। अब पुलिस कमिश्नर द्वारा FSL जांच के लिए CD तीसरी बार गई थी जिसके बारे में जांच में बताया गया कि ये टूटी हुई थी इसलिए प्ले नहीं हुई । इसके बाद कभी CD को जांच के लिए नहीं भेजा गया ।
संगठनों द्वारा धरना प्रदर्शन करने के बाद गवाहों के CrPC की धारा 161 के तहत बयान दर्ज हुए और 22 मार्च 2018 को CrPC की धारा 164 के तहत नाबालिग लड़की के मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज हुए और जिसमें उस मोबाइल के मांगे जाने पर जिसमें वो वीडियो बनी थी, 10 अप्रैल 2018 को उस मोबाइल के विषय में बताया और वीडियो के यूट्यूब लिंक के विषय में भी बताया। इतने साक्ष्य देने के बाद भी मजिस्ट्रेट ने पुलिस द्वारा केस बंद करने की रिपोर्ट को पीड़ित पक्ष को बताए बिना स्वीकार कर लिया ।
इस पर संजय पटेल ने पुलिस रिपोर्ट और इलाका मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए CBI जांच की मांग की । इसका संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस और निचली अदालत को नोटिस जारी किया । अगली सुनवाई में हाईकोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर को तलब किया, केस को रिओपन करते हुए मजिस्ट्रेट गुरुग्राम को पुलिस कार्यवाही का आदेश दिया ।
अब जिस मोबाइल में वीडियो बना था उसकी FSL जांच से सिद्ध हो चुका है कि वीडियो में कुछ गलत नहीं था। नाबालिग लड़की के वीडियो को तोड़-मरोड़कर गंदे ढंग से पेश किया गया था ताकि बापू आसारामजी को गलत ढंग से बदनाम किया जा सके।
लेकिन अभी तक दीपक चौरसिया गिरफ्तार नहीं हुआ है । लोगों का सब्र टूटना लाजमी था जो ट्विटर पर ट्रेंड बनकर उभरा ।
पुलिस, प्रशासन, इलाहाबाद हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, चंडीगढ़ हाईकोर्ट के सालों से चक्कर काट रहे इस परिवार को न्याय कब मिलेगा? जिसने इस परिवार और बच्ची को बदनाम किया, समाज से परिवार को तिरस्कृत करवाया उसे सजा कब मिलेगी ?
किसने कहने पर एक हिंदू संत को बदनाम करने के लिए एक नाबालिग बच्ची का आसरा लिया गया ?
कितने रुपयों में बिकी है मीडिया?
किसने इस पूरे षड़यंत्र के लिए फंडिंग की है?
ऐसे और भी कई प्रश्न हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकि है ।
एक नाबालिग लड़की का वीडियो तोड़-मरोड़कर गंदे तरीके से प्रसारित करना किसी जघन्य अपराध से कम है??
क्या ये किसी मीडिया चैनल को शोभा देता है?? क्या ऐसा काम करने वाला पत्रकार पत्रकारिता के नाम पर कलंक नहीं है??
क्या ऐसी मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहलाने के लायक है??
मीडिया का कर्तव्य है कि वो नागरिकों के अधिकार के लिए निष्पक्ष पत्रकारिता करें लेकिन जब मीडिया ही अपराध करने लगेगी तो आम आदमी खुद को कैसे देश में सुरक्षित महसूस करेगा ??
अब जनता यही प्रश्न कर रही है कि आम आदमी हो या कोई हिंदू नेता या साधु-संत होते है तो आधी रात को भी पुलिस गिरफ्तार कर लेती है पर इस बिकाऊ पत्रकार चौरसिया से क्यो डर रही है?
अब देखते है जनता की आवाज के बाद पुलिस कितना जल्दी गिरफ्तार करती है?
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