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जनता बोली न्यायायल हो चुका है निष्क्रिय, खुद ही लेना पड़ेगा फैसला

6 जनवरी  2019
🚩देश की अदालतों से फैसले के देरी के कारण और तारीख पर तारीख मिलने पर जनता में भारी रोष व्याप्त रहा है।
🚩हाल ही में 4 जनवरी को राम मंदिर की सुनवाई थी जो 30 सेकंड से भी कम समय चली और फिर क्या ? फिर से मिली एक नई तारीख । पिछले 26 सालों से न्यायालय में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद चल रहा है और अब जब समय आ रहा है कि हिंदुओं को उनका राम मंदिर मिल जाए तो मंदिर मिलना तो दूर न्यायालय से एक के बाद एक नई तारीख मिल रही है ।
🚩एक कवि ने लिखा है कि :-
थे राम अयोध्‍या के राजा ये सारा विश्‍व जानता है।
पर आज उन्‍हें अपने ही घर तम्‍बू में रहना पड़ता है।।
अल्‍लामा इकबाल ने उनको पैगम्‍बर बतलाया है।
उनसा मर्यादा पुरुषोत्तम न पृथ्‍वी पर फिर आया है।।
फिर भी इस सेकुलर भारत में राम नाम अभिशाप हुआ।
मंदिर बनवाना बहुत दूर पूजा करना भी पाप हुआ।।
90 करोड़ हिंदू समाज इससे कुंठित रहते हैं।
उनकी पीड़ा को समझे जो उसे राष्‍ट्रविरोधी कहते हैं।।
हिंदू उदारता का मतलब कमजोरी समझी जाती है।
हिंद में ही हिंदू दुर्गति पर भारत माता रोती है।।
हे लोकतंत्र के हत्‍यारों सेकुलर का मतलब पहचानो।
मंदिर कहना यदि बुरी बात तो राम का घर ही बनने दो।
गृह निर्माण योजना तो सरकार ने ही चलवाई है।
तो राम का घर बनवाने में आखिर कैसी कठिनाई है।।
🚩सच में आखिर ये बात आजतक समझ ही नहीं आयी कि जब देश हिंदुओं का है और ये सबको पता ही है कि अयोध्या रामजी की जन्म भूमि है, ये बात सिर्फ आस्था के आधार पर नहीं कही जा रही है खुदाई के द्वारा मिले अवशेषों से भी पता चल चुका है, फिर भी वहां मंदिर अब तक नहीं बन पाया । पाकिस्तान जैसे देश में भी गुरुद्वारे और मंदिर बन रहे हैं, लेकिन भारत जो अपनी आध्यत्मिकता के लिए प्रसिद्ध है, उसी देश में हिंदुओं के आराध्य श्री राम को टेंट में रहना पड़ रहा है ।
🚩26 वर्षों का समय कोई छोटी अवधि नहीं है किसी मुद्दे को सुलझाने के लिए, लेकिन न्यायालय से सहीं फैसला अब तक नहीं आया, ये न्यायालय की निष्क्रियता नहीं तो और क्या है ?
🚩आज सुबह सोशल मीडिया पर भी कुछ लोग अपने ट्वीट्स के माध्यम से हिंदुओं के प्रति न्यायालय की निष्क्रियता को बता रहे थे ।
🚩आइये जानते है क्या कह रही है जनता:-
🚩(1) अंजली लिखती हैं कि
किसी भी देश की पहचान उसके धर्म और संस्कृति से होती है । न्यायालय और कानून उनकी रक्षा के लिए बने होते हैं, लेकिन जब वही समाज के हित में त्वरित निर्णय न दें तो लोग कहाँ जाएं?
#न्यायालय_की_निष्क्रियता
#Ayodhya
🚩(2) नितेश लिखते हैं कि आज के समय में भारत जैसे देश में जहां हिन्दू कहनेभर को बहुसंख्यक हैं पर उनकी भावनाओं को कभी समझने की न तो देश की सरकार को समय है न ही न्यायपालिका को। #न्यायालय_की_निष्क्रियता
#Ayodhya
🚩(3) शिव लिखते हैं कि देश की जनता का यह कहना है कि 👇
क्या हमारे देश की #न्यायालय_की_निष्क्रियता की वजह से #Ayodhya में श्रीराममंदिर बनने का सपना कभी पूरा भी होगा?
#Sabarimala मंदिर में न्याय देने को आतुर अदालत #श्रीराममंदिर के मामले में फेल होती हुई दिखाई दे रही है।
🚩(4) करण ने कहा है कि तारीख पे तारीख!!
आतंकी और देशद्रोही, गद्दारों के लिये आधी रात में खुलनेवाली अदालत के पास #Ayodhya राममंदिर पर फैसला सुनाने के लिये समय नहीं है।
हिंदुओं को #न्यायालय_की_निष्क्रियता के कारण अदालत के भरोसे बैठने के बजाय अब खुद ही फैसला लेने का वक्त आ गया है।
🚩(5) ब्रज मोहन जी ने कहा है कि 1 ईसाई ने सबरीमाला पर याचिका लगाई
और
SC ने पूछा भी नही तेरा हिन्दू मन्दिर से क्या मतलब? और  फैसला सुना दिया ??🤔
राम लला के मंदिर के  8 भाषाओं में करीब 9000 पन्नों में 22 याचिका लगाई गई है उनपे तारीख पर तारीख 😡
#न्यायालय_की_निष्क्रियता
#Ayodhya
🚩ऐसे तो एक दो नही हजारों ट्वीट हो रहे थे जिसमें न्यायालय के प्रति जनता नाराज दिख रही थी ।
🚩क्या ऐसे ही भारत का सपना देखा था हमारे देश के वीरों ने, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी देश को आज़ाद कराने में । एक ओर जहां एक सुखद राज्य की कल्पना करते ही रामराज्य की तस्वीर सामने आ जाती है, वहीं दूसरी ओर बड़े ही शर्म की बात है कि भारत में ही रामजी की जन्मस्थली में उनका एक मंदिर तक नहीं है ।
🚩ये वही देश है जहां न्यायालय याकूब मेनन जैसों की सुनवाई के लिए रात को 2 बजे भी खुलते हैं ।
ये वही देश हैं जहाँ कसाब जैसे आतंकियों को ऐशो आराम की ज़िंदगी दी जाती है । बिरियानी खिलाई जाती है ।
🚩ये वही देश है जहाँ मां कही जाने वाली गाय की दिन दहाड़े, धड़ल्ले से हत्या कर दी जाती है।
ये वही देश है जहाँ के लोगों में पश्चिमी गंदगी फैलाने वाले अभिनेता और अभिनेत्रियों के जन्मदिन तो याद रहते हैं, लेकिन सच्ची सीख देने वाले देश भक्तों का नाम तक नहीं पता होता ।
🚩और ये वही देश है जहाँ देश को बर्बाद करने वालों को तो इनाम दिए जाते हैं, लेकिन देश की सच्ची शान, सच्चे मायनों में रक्षक संतों को अपमानित किया जाता है ।
🚩फिर भी हम कहेंगे कि हमारा देश महान है पता है क्यों ? क्योंकि इस हमारी संस्कृति और संस्कृति के रक्षक संत इस देश में विराजमान हैं ।
🚩सबरीमाला, जलीकट्टू, दही हांडी, दीपावली पर फटाके नहीं फोड़ने आदि हिन्दू विरोधी फैसले न्यायालय जल्दी देती है । पक्ष वाले फैसले पर तारीख पर तारीख मिलती है ।
इससे 90 करोड़ हिंदूओ में रोष व्याप्त है ।
🚩खैर बदले हुए कैलेंडर के साथ यही उम्मीद है कि जल्द ही न्यायालय हिंदुओं के प्रति अपनी निष्क्रियता को दूर करे और हिंदुओं के हक में भी फैसले दे ।

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