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गृह मंत्रालय : आतंकियों की भर्ती के लिए हो रहा मदरसों का उपयोग, कब बैन होंगे?

04 जुलाई 2019
🚩कोई भी आतंकी जन्म से ही आतंकी नहीं होते, उनको गलत शिक्षा दी जाती है तभी वे आतंक का रास्ता पकड़ते हैं और ऐसी जिहादी सोच वाली शिक्षा अधिकतर मदरसों में दी जा रही है । कई जगह की रिपोर्ट में ये सामने आया है इसलिए आतंकवाद को जड़-मूल से खत्म करना है तो सरकार को सबसे पहले मदरसों पर ध्यान देना चाहिए । पाकिस्तान सरकार ने भी 182 मदरसों को अपने हाथ में ले लिया है। इन मदरसों के आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होने का संदेह है।

🚩आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और खून खराबे के बीच गृह मंत्रालय ने बड़ा खुलासा किया है ! गृह मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में कुछ मदरसों का उपयोग आतंकी संगठनों की मदद करने में किया जा रहा है !
🚩मदरसों के लिए कट्टरता फैला रहे आतंकी-
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि बर्दवान और मुर्शिदाबाद के कई मदरसों का उपयोग आतंकी कर रहे हैं । बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश में इसके जरिए कट्टरता फैलाने और संगठन में भर्ती का काम करते हैं ।
🚩बता दें कि भारत में आतंकवादी विचारधारा वाले लोग न बनें इस उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने कुछ दिन पहले मदरसों को बंद करने की मांग दोहराई है । पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर वसीम रिज़वी ने प्राथमिक मदरसों को बंद करने को कहा है । वसीम रिज़वी ने लिखा कि “मदरसों में बच्चों को बाकियों से अलग कर कट्टरपंथी सोच के तहत तैयार किया जाता है । यदि प्राथमिक मदरसे बंद ना हुए तो 15 साल में देश का आधे से ज्यादा मुसलमान आईएसआईएस का समर्थक हो जाएगा । उन्‍होंने इसके बजाय हाई स्कूल के बाद धार्मिक तालीम के लिए मदरसे जाने के विकल्प का सुझाव दिया । कोई भी मिशन आगे बढ़ाने के लिए बच्चों का सहारा लिया जाता है और हमारे यहां भी ऐसा ही हो रहा है । ये देश के लिए भी खतरा है ।
🚩पाकिस्तान और अन्य देशों की तरह भारत में भी कुछ मदरसो में आतंकी गतिविधियां होने की बात कई बार सामने आई है, इसे देखते हुए भारत सरकार को भी देश के मदरसों पर छापे मार कर जांच करनी चाहिए और बैन कर देना चाहिए ऐसी जनता की अपेक्षा है ।
🚩पश्चिम बंगाल में हिंसा की जड़ में क्या है?
आज पश्चिम बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या, आजादी से पहले के स्तर पर पहुंच रही है। 1941 में पश्चिम बंगाल में 29 प्रतिशत मुसलमान जनसंख्या थी। आज ये आंकड़ा 27 प्रतिशत पहुंच गया है । जबकि देश के बंटवारे के बाद 1951 में पश्चिम बंगाल में केवल 19.5 प्रतिशत मुसलमान थे। बंटवारे के बाद बड़ी तादाद में मुसलमान, पाकिस्तान चले गए थे।
🚩हम मुसलमानों की जनसंख्या में बढ़ोत्तरी के आंकड़ों पर गौर करें तो चौंकानेवाली बातें सामने आती हैं । 2001 से 20111 के बीच पश्चिम बंगाल में मुस्लिम जनसंख्या 1.77 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ी । जबकि देश के बाकी हिस्सों में मुस्लिम जनसंख्या 0.88 प्रतिशत की दर से बढ़ी ।
🚩यूं तो राजनीति में आंकड़ों की बहुत बात होती है। परंतु पश्चिम बंगाल की तेजी से बढ़ती मुस्लिम जनसंख्या की आेर से सबने आंखें मूंद रखी थीं । सियासी फायदे के लिए देशहित की कुर्बानी दे दी गई। अगर हम आंकड़ों पर ध्यान देते तो फौरन बात पकड़ में आ जाती कि जिस बंगाल में कारोबार ठप पड़ रहा था, उद्योग बंद हो रहे थे, वहां लोग रोजगार की नीयत से तो जा नहीं रहे थे ।
🚩आज की तारीख में हम घुसपैठ के सियासी असर की बात करें तो, पश्चिम बंगाल के तीन जिलों में मुसलमान बहुमत में हैं । लगभग 100 विधानसभा सीटों के नतीजे मुसलमानों के वोट तय करते हैं । यानी मुस्लिम वोट, पश्चिम बंगाल की सियासत के लिहाज से आज बेहद अहम हो गए हैं । इसीलिए राज्य में ममता बनर्जी जमकर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं। उनसे पहले वामपंथी दल यही कर रहे थे ।
🚩तुष्टीकरण की गंदी सियासत का नमूना हमने 2007 के चुनावों में देखा था । उस समय अपनी तरक्कीपसंद राजनीति के बावजूद वामपंथी सरकार ने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन को कोलकाता से बाहर जाने पर मजबूर किया । इसकी वजह ये थी कि बंगाल के कट्टरपंथी मुसलमान, तस्लीमा के शहर में रहने का विरोध कर रहे थे । आज का पश्चिम बंगाल सांप्रदायिक रूप से और भी संवेदनशील हो गया है ।
🚩ममता बनर्जी ने सांप्रदायिकता को अपना सबसे बड़ा सियासी हथियार बना लिया है । उनका आदर्शवाद सत्ता में रहते हुए उड़न-छू हो चुका है । राज्य के 27 प्रतिशत मुस्लिम जनसंख्या को लुभाने के लिए ममता किसी भी हद तक जाने को तैयार दिखती हैं । इसीलिए वो नूर-उल-रहमान बरकती जैसे मौलवियों को शह देती हैं ।
🚩ममता बनर्जी ने मालदा के हरिश्चंद्रपुर कस्बे के मौलाना नासिर शेख की आेर से आंखें मूंद लीं । इस मौलाना ने टीवी, संगीत, फोटोग्राफी और गैर मुसलमानों से मुसलमानों के बात करने पर पाबंदी लगा दी थी । राज्य के धर्मनिरपेक्ष नियमों के विरोध में जाकर ममता ने इमामों और मौलवियों को उपाधियां और पुरस्कार दिए हैं ।
🚩ममता ने मुस्लिम तुष्टीकरण की सारी हदें तोड़ दी हैं । तभी तो #दुर्गा पूजा के बाद 4 बजे के बाद मूर्ति विसर्जन पर, मुहर्रम का जुलूस निकालने के लिए रोक लगा देती हैं । उन्हें आम बंगालियों की धार्मिक भावनाओं का खयाल तक नहीं आता । कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी सरकार के इस फैसले को अल्पसंख्यकों का अंधा तुष्टीकरण कहा था ।
🚩क्या ममता बनर्जी को ये समझ में आएगा कि मुस्लिम तुष्टीकरण से बंगाल में अब काजी नजरुल इस्लाम जैसे लोग नहीं पैदा होंगे । बल्कि इससे इमाम बरकती और नसीर शेख जैसे मौलवियों को ही ताकत मिलेगी । ये वही लोग हैं जो मुसलमानों की नुमाइंदगी का दावा करते हैं, मगर उन्हीं के हितों को चोट पहुंचाते हैं। ये सांप्रदायिकता फैलाते हैं ।
🚩ममता बनर्जी सांप्रदायिकता की ऐसी आग से खेल रही हैं, जिस पर काबू पाना उनके बस में भी नहीं होगा ।
🚩केंद्र सरकार को जनसंख्या नियंत्रण कानून लाना चाहिए, मदरसों पर बैन लगाना चाहिए और घुसपैठियों को बाहर करना चाहिए तभी देश सुरक्षित रह पायेगा ।
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