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क्या मुसलमानों के लिए धर्म पहले और देश बाद में है?

20अगस्त 2019
http://azaadbharat.org
🚩भारत देश के अधिकतर मुसलमान धर्म को पहले, देश को बाद में मानते हैं। ये मानसिकता देश के लिए भविष्य में बड़ा खतरा हो सकती है।
🚩देश की राजधानी दिल्ली में जामा मस्जिद के शाही ईमाम बुखारी पर 65 वारंट है उसमें कई तो गैर जमानती वारंट है पर पुलिस उसको गिरफ्तार नहीं कर रही। इन्हें देश से कोई मतलब नहीं है, निजी स्वार्थ के लिए कोई भी जुर्म कर देना है। ऊपर से पुलिस बोल रही है कि अगर बुखारी को गिरफ्तार किया तो दंगे भड़क सकते हैं। अब बताओ क्या वो देश के संविधान से ऊपर है, देश से ऊपर है। और इससे दूसरे मुस्लिमों में क्या सन्देश जाएगा! ये देश की कानून व्यवस्था के साथ खेलने में क्यों हिचकिचाएंगे!

🚩पुलवामा हमले के बाद जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि पाकिस्तान के हर आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। भारत ने परमाणु बम दिवाली के लिए नहीं रखे। इस पर जम्मू-कश्मीर की भूतपूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती कहती है कि पाकिस्तान ने भी परमाणु बम ईद के लिए नहीं रखे है। देश लीजिए कितनी विकृत मानसिकता है इनकी। जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं।
🚩18 जून 2017 को ICC Champions Trophy के फाइनल में पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने भारतीय क्रिकेट टीम को हराया तो देश के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में आतिशबाजी की गई। कुछ मुस्लिम ये भी बोले कि भारतीय टीम हारी तो दुख हुआ पर कौम के जीतने की खुशी हुई। क्या ऐसी मानसिकता देश की अस्मिता के लिए खतरा नहीं है।
🚩अकबरुद्दीन ओवैसी कहता है कि पुलिस हटा लो तो हम देख लेंगे हिन्दुओं को। हिन्दू कायर है, सबको काट डालेंगे। कितना ज़हर है इनके अंदर। देश में अराजकता फैलाने वाला बयान देने वाले मुस्लिमों की सूची लम्बी है। अफसोस इस चीज का है कि ना ही सरकार, ना ही न्याय व्यवस्था ऐसे मुस्लिमों के खिलाफ कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं कर रही।
🚩रामपुर, उत्तर प्रदेश के सांसद आज़म खान पर जब मनी लॉन्ड्रिंग करने पर केस दर्ज होता है तो वो बोलता है कि हमारे पूर्वज पाकिस्तान नहीं गए तो इसकी सजा हमें दी जा रही है। इसे कहते है पहले चोरी, फिर सीना जोरी। पहले जुर्म किया, फिर बाद में बचने और देश को भड़काने के लिए उसे बंटवारे और धर्म से जोड़ दिया। मतलब इनको देश के संविधान की धज्जियां उड़ाने का भी कोई अफसोस नहीं। ये तो बेशर्मी की इंतहा है।
🚩एक मीडिया चैनल पर चलती डिबेट में एक मौलवी एक महिला को थप्पड़ मार देता है, ये है असहनशीलता की पराकाष्ठा। मतलब इन्हें कानूनी कार्यवाही का भी कोई डर नहीं है। ये महिलाओं को पैर की जूती समझते हैं, इज्जत तो दूर की बात, हलाला के नाम पर औरतों का शोषण करते हैं। तीन तलाक की कुप्रथा से तत्कालीन केंद्र सरकार ने तो मुस्लिम औरतों को कानून बनाकर बचा लिया है पर दूसरी सरकार आने पर फिर से फिर से तीन तलाक को वैध कराने की धमकी भी मिल रही है।
🚩मुस्लिम देश के संविधान को, कानून को नहीं मानते। इन्होंने तो अपने लिए अलग से शरई अदालतों की मांग तक कर रखी है। अब बताओ क्या किसी धर्म विशेष के लिए अलग से अदालत सम्भव है! और देश के संविधान का अपमान करना, उसके खिलाफ मांग करना क्या देश से गद्दारी नहीं है।
🚩जब पुलिस देश में कुछ मस्जिदों में रेड मारती है तो उनमें तलवारें, बंदूकें मिलती हैं। ऐसे लोग क्या देश और उसकी कानून व्यवस्था का सम्मान करेंगे! जहाँ पर नमाज़ पढ़ते हैं, वहीं हथियार भी रखते हैं। इसका मतलब मस्जिदों में इनको गृहयुद्ध के लिए तैयार किया जा रहा है ताकि समय आने पर हिन्दुओं और दूसरे धर्म के लोगों का खात्मा कर सके। कुछ होंगे अच्छे मुसलमान भी है पर गृहयुद्ध की स्तिथि में उनको भी मुस्लिमों का साथ देना होगा। हिन्दू और दूसरे धर्मों के लोग इससे अनभिज्ञ है और इस स्तिथि के लिए तैयार भी नहीं है। उल्टा हिन्दुओं को तो जाति पाति में तोड़ने के षड़यंत्र होते रहते हैं। क्या देश की कानून व्यवस्था के लिए ये खतरा नहीं है!
🚩कुछ मदरसों में देश विरोधी गतिविधियां चलती है, देश के खिलाफ भड़काया जाता है। क्या ऐसी शिक्षा से मुस्लिम युवा देश के खिलाफ खड़े नहीं होंगे! वे भारत को अपना दुश्मन ही मानेंगे। तो बताओ क्या भविष्य होगा देश का!
🚩अब समय आ गया है हिन्दू जाग्रत हो क्योंकि अगर अब हिन्दू एक नहीं हुए तो उनके सामने हिन्दुत्व का विनाश हो जाएगा और वो कुछ नहीं कर सकेंगे। कानून व्यवस्था को उचित कदम उठाने होंगे। सरकार को भी वोटबैंक की चिंता छोड़ देशहित को ऊपर रखकर उचित निर्णय लेने होंगे। देश में समान नागरिकता कानून बनाना होगा।
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