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आज से बच्चियों से रेप की सजा होगी फांसी, पर क्या इससे रेप बंद होंगे ?

23 जून 2019
🚩देश में कुछ दिनों में बच्चियों के साथ दरिंदगी वाली ऐसी घटनाएं घटी हैं जिससे देशभर में रोष व्याप्त था । इसके मद्देनजर शनिवार को प्रधानमंत्री आवास पर हुई केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में 0-12 साल की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को सजा-ए-मौत देने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई ।
 रविवार को इस अध्यादेश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। इसके बाद यह 6 महीनों के लिए कानून बन गया है । इन 6 महीनों के बीच सरकार इस अध्यादेश को संसद के दोनों सदनों में पास कराएगी । बच्चियों से रेप के गुनहगारों को अब सख्त कैद से लेकर फांसी तक की सजा देने का रास्ता साफ हो गया है । साथ ही यह कानून आज से पूरे देश में लागू हो गया ।

🚩अध्यादेश के प्रावधानों के तहत अब 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से रेप के मामले में अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी । इस उम्र की लड़कियों से बलात्कार के मामले में न्यूनतम सजा 10 वर्ष कैद से बढ़ाकर 20 वर्ष की गई है वहीं ऐसे मामलों में अधिकतम उम्रकैद होगी, यानी स्वाभाविक मौत तक कैद । 16 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के साथ रेप की सज़ा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल तक की गई।
🚩बलात्कार के कड़े कानून से हम खुश तो गये और होना भी चाहिए क्योंकि हमारी छोटी मासूम बच्चियों के साथ कोई दरिदंगी करेगा तो उसको माफ नहीं करना चाहिए उसको तुरंत फाँसी की सजा होनी चाहिए इससे हम भी सहमत हैं, लेकिन ऐसे कड़े कानून से फायदे की जगह नुकसान होने की संभावना भी तो है और क्या इन कड़े कानूनों से बलात्कार की घटनाएं बंद हो जाएंगी ?
🚩कड़े कानून से रेप बंद होंगे ?
बलात्कार के कड़े कानून बनाने के साथ-साथ जो फिल्मों, सीरियलों, विज्ञापनों, अखबारों, टीवी चैनलों, मीडिया, नावेल, संगीत, इंटरनेट, ऑफलाइन डीवीडी, पेनड्राइव आदि के द्वारा जो अश्लीलता परोसी जा रही है उसपर भी कड़े कानून बनने चाहिए,  सबसे पहले इसपर रोक लगनी चाहिए क्योंकि बलात्कार की घटनाओं को अंजाम देने में इनका सबसे ज्यादा हाथ है, जबतक इनपर रोक नहीं लगेगी और इनकी जगह धार्मिक फिल्में, सीरियलें, साहित्य, संगीत, अख़बार, विज्ञापन नहीं दिए जाएंगे, तब तक ऐसी घटनाएं कम नहीं होंगी । इंटरनेट पर तो इतनी गंदगी छाई है कि उसको देखने के बाद तो नाबालिग बच्चे भी महिलाओं को पवित्र भाव से नहीं देख पा रहे हैं । बलात्कार के कड़े कानून के साथ इनपर भी शीघ्र कड़े कानून बनने चाहिए और साधु-संतों द्वारा दी जा रही संयम की शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए, तभी देश में महिलाओं के प्रति पवित्रता का भाव बढ़ेगा और रेप जैसी घिनौनी घटनाओं को रोकने में सफलता मिलेगी।
🚩इसका गलत दुरुपयोग होगा?
निर्भया कांड के बाद बलात्कार के कड़े कानून बने पर रिपोर्ट के अनुसार 2012 में दर्ज किये गए रेप केसों में से ज्यादातर केस बोगस पाए गए । 2013 की शुरुआत में यह आँकड़ा 75% तक पहुँच गया ।
🚩दिल्ली महिला आयोग की जाँच के अनुसार अप्रैल 2013 से जुलाई 2014 तक बलात्कार की कुल 2,753 शिकायतों में से 1,466 शिकायतें झूठी पायी गयीं ।
🚩हर साल घट रही है दोष सिद्धि
रेप के मामलों में आरोपियों को दोषी करार दिए जाने की दर साल-दर-साल घटती जा रही है। 2016 में महिलाओं से रेप के महज 24 फीसदी मामलों में ही आरोपी दोषी साबित हो सके । वहीं, पॉक्सो के तहत 20 फीसदी से भी कम मामलों में दोष सिद्धि हो सकी ।
🚩दहेज कानून की तरह बलात्कार कानून का भी भयंकर दुरूपयोग हो रहा है उनपर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि पैसे ऐंठने के लिए कई गिरोह काम कर रहे हैं, जो नाबालिग बच्चियों को फुसलाकर केस करवा देते हैं । बाद में लाखों रुपये ऐंठने के बाद मामला रफा-दफा कर दिया जाता है । दूसरी तरफ कुछ मनचली लड़कियां भी बदला लेने की भावना से या पैसे ऐंठने के चक्कर में झूठे केस कर देती हैं । तीसरी तरफ राष्ट्रविरोधी ताकतें हिंदुनिष्ठ लोग एवं साधु-संतों को फंसाने के लिए इस कानून का भयंकर दुरुपयोग कर रहे हैं इसपर भी रोक लगनी चाहिए।
🚩हमारा कहना ये नहीं है कि बलात्कार के कड़े कानून न बनें पर हमारा यही कहना है कि बलात्कार के कड़े कानून के साथ जो अश्लीलता परोसी जा रही है उनपर भी कड़े कानून बनें और जो इस कानून का दुरूपयोग कर रहे हैं उनको भी कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए, नहीं तो अश्लीलता परोसने पर न रेप कम होंगे और ना ही कानूनों का दुरुपयोग करने वालों को सजा होगी तो निर्दोष पुरूष फँसते जाएंगे ।
🚩सरकार से यही प्रार्थना है कि एक साथ तीनो कड़े कानून बनाओ बलात्कार करने वालों को फाँसी, अश्लीलता फैलाने वालों को उम्रकैद और झूठे केस करने वालो भी उम्रकैद हो तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी औए निर्दोष पुरुषों पर भी अन्याय नहीं होगा ।
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